कोरोना कहर में मेडम पूनियां बनी बेसहारों का सहारा ,निजी कोस से बांटी राशन किट ।

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कोरोना कहर में मेडम पूनियां बनी बेसहारों का सहारा  ,निजी कोस से बांटी राशन किट 
भादरा (राजस्थान)  - कोरोना की पहली मार से अभी तक उभर भी नही पाए थे इतने में ही दूसरी लहर की दस्तक ने आम मजदूर की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन कहते है ना ईश्वर की लीला अजब है वो किसी को भूखा नही सोने देता कोरोना के चलते पिछले एक साल झुगी झोंपड़ी व कुछ घुमंतु प्रजातियों के जीन दुर्लभ हो गया  है ऐसे में राज्य सरकार  द्वारा चलाई गई अपनी रसोई का फायदा भी इन लोगों को नहीं मिल पा रहा था अचानक एक दिन यह समाचार मैडम संतोष पुनिया के पास चला गया मैडम पुनियानी इंसानियत की अच्छी मिसाल पेश करते हुए बिना किसी दिखावे के बिना किसी फोटो खींच 50 झुग्गी झोपड़ी वाले जिनका कोई एक ठिकाना नहीं है उनको राशन किट उपलब्ध करवाई जिसमें 10किलो गेहूं का आटा 1 किलो चावल  1 किलो दाल साबुन तेल इत्यादि सामग्री सहित तकरीबन 700 रुपए  एक  रासन किट का खर्च से  खरीदकर  उपलब्ध करवाया ! मैडम संतोष पुनिया एक समाज सेविका के साथ-साथ उच्च विचारधारा की धनी घुमंतू व झुग्गी झोपड़ी वाले लोगों ने मैडम पूर्णिया का दिल से शुक्रिया कहां सबसे खास बात यह थी इस परमार्थ के कार्य किसी भी तरीके का कोई दिखावा नजर नहीं है आइए आज हम आपको परिचय करवाते हैं संतोष पूनियां से
संतोष पूनियां का जन्म 5 सितंबर 1982 में हिसार हरियाणा में हुआ इनके पिता श्री बहादुर सिहं चाहर व माता का नाम परमेश्वरी देवी है  इनका पैतृक गांव कागदाना  है इनका विवाह छोटी उम्र में  हनुमानगढ़ जिले के भादरा तहसील के गावँ मलखेड़ा में कर दिया लेकिन परमेश्वर को कुछ और भी मंजूर था  पूनियां 2 बच्चों की माँ बनी व मात्र 22 साल की उम्र में विधवा हो गई इनके पति की अकाल मृत्यु के बाद सन्तोष पूनियां पर दुःखो का पहाड़ टूट गया  लेकिन इन्होंने हार नही मानी और समाज की रूढ़िवादी विचार धाराओं को  दर किनार करते हुए पढ़ाई करने की सोची पूनियां महज कक्षा 10 वी पास करने के बाद भी वो आगे पढ़ना चाहती थी पति की मौत के बाद अपने दोनो बेटो को लेकर पढ़ाई करने पुनः प्रारम्भ किया कठिन परिश्रम किया और  आज एक सरकारी अध्यापिका  है इनका जीवन सरल व सीधा है इनकी पहली पोस्टिंग  गावँ बरवाली में हुई मैडम पूनियां ने अपनी पहली  सैलरी स्कूल पर खर्च कर बच्चो के लिए प्रेरणादायक बन गई  व 2017 में बालिका स्कूल में ज्वाइनिंग के बाद स्कूल की काया पलट कर दी मेडम पूनियां वाक्य ही एक संघर्ष शील महिला है  व महिला शशक्तिकरण का एक उदाहरण है

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