सनशाइन समय बस्ती से मनीष मिश्र की रिपोर्ट
बस्ती । उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना कोरोना संक्रमण से अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चो का सहारा बनेगी। उत्तर प्रदेश ऐसी योजना लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य है। उक्त विचार राज्यपाल आन्नदीबेन पटेल ने व्यक्त किया। लोक भवन लखनऊ सभागार में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होने बताया कि उन्होने विश्वविद्यालय तथा डिग्री कालेज में अध्ययनरत माता-पिता विहीन बच्चों को गोद लेने के लिए सभी विभागाध्यक्षों एवं कुलपतियों को निर्देशित किया है। उन्होने कहा कि लड़कियों को विशेष रूप से समय-समय पर मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी। इस अवसर पर उन्होने इस योजना के लोगों का बटन दबाकर अनावरण किया। उन्होने कहा कि बालिकाओं के विवाह के लिए इस योजना में रू0 1.01 लाख दिये जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह विवाह योग्य होने पर कन्याओ के लिए विशेष लाभदायक होगा।
मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत कुल 4050 बच्चों को चिन्हित किया गया है, इसमें से 240 बच्चों के माता-पिता दोनो की मार्च 2020 से अबतक कोरोना के कारण मृत्यु हो गयी है। 3810 बच्चे ऐसे है, जिनके माता या पिता की कोरोना से मृत्यु हुयी है, ऐसे प्रत्येक परिवार को 4000 रूपया प्रतिमाह भरण-पोषण के लिए दिया जायेंगा। उन्होने सभी 4050 बच्चों के खाते में 4.86 करोड़ रूपये की धनराशि बटन दबाकर आनलाइन स्थानान्तरित किया। यह धनराशि प्रत्येक बच्चे के भरण-पोषण के लिए तिमाही किश्त 12000 रूपये खाते में दी गयी।
इस अवसर पर उन्होने कहा कि 18 वर्ष की आयु तक बच्चे के भरण-पोषण की व्यवस्था की जायेंगी। बच्चों को उनके उम्र के अनुसार बाल संरक्षण गृह में रखा जायेंगा। पढने वाले लड़को को अटल आवासीय विद्यालय तथा लड़कियों को कस्तूरबा गॉधी बालिका विद्यालय में प्रवेश दिलाया जायेंगा। उन्होने महिला एवं बाल कल्याण विभाग को निर्देश दिया है कि कोरोना काल में अन्य बीमारियों से मृत्यु होने पर माता-पिता को खोने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ दिलाया जाय। साथ ही निराश्रित विधवा महिला को योजना के अन्तर्गत लाभ दिलाया जाय।
प्रदेश की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्वाती सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दिया। इस अवसर पर स्वास्थ्य एंव चिकित्सा मंत्री जय प्रताप सिंह, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला माथुर, बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ0 विशेष गुप्ता, मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी, अपर मुख्य सचिव एस0 राधा चौहान उपस्थित रहे। प्रमुख सचिव महिला एंव बाल विकास वी0 हेकाली झिमोमी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
कलेक्ट्रेट सभागार बस्ती मे आयोजित कार्यक्रम में विधायक रवि सोनकर तथा जिलाधिकारी श्रीमती सौम्या अग्रवाल ने उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अन्तर्गत चयनित 29 बच्चों को धनराशि का स्वीकृति पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर सीडीओ डा0 राजेश कुमार प्रजापति, सांसद प्रतिनिधि राजेश पाल चौधरी, विधायक प्रतिनिधि राज कुमार शुक्ल, राजेश सिंह, सुनील सिंह, बीएसए जगदीश शुक्ल, प्रोबेशन अधिकारी अनुपम यादव, रीना सिंह उपस्थित रही। जीजीआईसी की शिक्षिका मानवी सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया।
जिलाधिकारी बनी निराश्रित बच्चों की संरक्षक
जिलाधिकारी ने इस अवसर पर सभी पीड़ित परिवार एवं बच्चों से भेट कर के उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का प्राथमिकता पर निस्तारण किया जायेंगा। उन्होने कहा कि वे अपनी समस्याओं के संबंध में समय-समय पर उनसे अथवा सीडीओ से सम्पर्क करके अवगत कराते रहे। बच्चों की शिक्षा एंव भरण-पोषण से हट कर भी कोई समस्या हो तो अवगत कराये। उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की रहेंगी।
उन्होने सीडीओ तथा सीआरओ नीता यादव के साथ प्रत्येक परिवार से भेट किया तथा उनकी समस्याओं को सुना। जिलाधिकारी की इस पहल पर बच्चों के साथ आये उनकी माताओं ने अपनी समस्याए खुल कर बताया। सहायक भूलेख अधिकारी राधवेन्द्र पाण्डेय ने सबकी समस्याओं को नोट किया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रोबेशन कार्यालय की समन्वयक रीना सिंह ने सभी की समस्याओं से संबंधित प्रार्थना पत्र प्राप्त किया। इसमें मुख्य रूप से रोजगार दिलाने, वरासत कराने, भूमि का पट्टा दिलाने का आग्रह किया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि इन प्रार्थना पत्रों पर समय से कार्यवाही की जायेंगी तथा स्वयं उनके एवं सीडीओ के स्तर पर प्रत्येक सप्ताह अनुश्रवण किया जायेंगा। इस संबंध में उन्होने पीड़ित परिवार को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सीडीओ तथा राजस्व संबंधी लाभ दिलाने के लिए सीआरओ को निर्देशित किया है।
इस क्रम में गोरखपुर में संविदा पर तैनात रहे हेमवन्त कुमार सिंह की पत्नी द्वारा बताया गया कि उनके हिस्से की भूमि का अभी तक वरासत दर्ज नही हुआ है। इस संबंध में सीआरओ ने संबंधित एसडीएम से फोन पर वार्ता करके तत्काल वरासत दर्ज करवाया, जिसे संबंधित परिवार ने तहसील सदर में जा कर नकल भी प्राप्त कर लिया।

