साकार हो,ग्राम-स्वराज्य का सपना :अंशुल यादव

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चकरनगर । जनपद के प्रथम नागरिक जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव "अंशुल"ने आज यहाँ क्षेत्र पंचायत कार्यालय चकरनगर पर नवनिर्वाचित ब्लाक प्रमुख के शपथ ग्रहण समारोह में "ग्राम स्वराज की संकल्पना" को साकार करने के लिए जनजागरण की महती आवश्यकता पर बल दिया।नये तेवरों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष की अपनी दूसरी पारी की शुरूआत करने वाले अंशुल यादव ने आज क्षेत्र पंचायत कार्यालय चकरनगर के सभागार में जिस मुद्दे को साकार करने की बात कही, वह इस बात की द्योतक है कि जिला पंचायत अध्यक्ष ग्राम स्वराज्य जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर कितने संजीदा हैं। क्षेत्र पंचायत कार्यालय चकरनगर के सभागार में नवनिर्वाचित ब्लाक सपा ब्लाक प्रमुख श्रीमती सुनीता देवी के शपथ ग्रहण समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव "अंशुल" ने महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की संकल्पना को साकार करने के लिए महती आवश्यकता पर बल दिया है। अपने मुख्य अतिथि के सम्बोधन में उन्होंने आज कहा कि गाँधी जी ने कहा था कि गांव देश के मजबूत ढाँचे हैं, जो देश के विकास और गरिमा को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण स्थान रखते है।विकास की शुरूआत ग्राम से ही होता है,फिर इस तरह प्रत्येक व्यक्ति से राष्ट्र तक। इसी संदर्भ में समतुल्यता लाने हेतु हमारे समक्ष एक ऐसी संकल्पना की ! जिससे विकास की शुरूआत ग्राम से होकर देश के संसद तक पहुंचती है, वह है ग्राम स्वराज।जनपद के प्रथम नागरिक ने आगे कहा कि गाँधी जी का मानना था कि एक आदर्श राज्य की स्थापना की अनिवार्य शर्त है ‘ राजनैतिक स्वतंत्रता ‘ । इसी कारण उन्होंने भारत की राजनैतिक स्वतंत्रता के लिये एक अहिंसक आंदोलन का मार्ग अपनाया था। वे राजनैेतिक स्वतंत्रता के लिए जिस शब्द का प्रयोग करते थे वह है ‘ स्वराज ’। वास्तविक शब्दों मे स्वराज का अर्थ है, ‘अपना राज्य’, ‘अपना शासन’ । गाँधीजी ने इस शब्द का प्रयोग और अधिक गूढ़ अर्थ में किया है उनके अर्थ में स्वराज का अर्थ ‘ अपना शासन ’ तो है ही, साथ-साथ ही वे‘ स्वराज ’ शब्द के अर्थ को और विकसित करते हुए कहते हैं कि ‘ स्वराज ’ एक अनुभूति है, एक भावना है तथा स्वराज वास्तविक रूप तभी लेता है जब यह भावना हर मानस में घर कर लें। उन्होंने अंत में कहा कि गाँधीजी के अनुसार ग्राम स्वराज का सीधा अर्थ- आत्म संयम या आत्मराज्य है। गाॅंधीजी अपने सपनोें के स्वराज में किसी जाति-धर्म का बंधन नहीं मानते, स्वराज सबके लिए हैं। गाँधीजी की ग्राम स्वराज की संकल्पना आज के संदर्भ में प्रासंगिक तो है ही साथ ही व्यावहारिक भी है । हमारे देश में पंचायत व्यवस्था जो कि विकेन्द्रीकृत व्यवस्था का ही उदाहरण है, का एक गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति महात्मा गाँधीजी के आदर्शोे एवं संकल्पना को साकार करने पर ही होगी। अतः हमें ऐसे महापुरूष के आदर्शों पर चलने हेतु दृढ़ प्रतिज्ञ होना आवश्यक है,जो यथार्थ में हमारे देश-काल परिस्थितियों, संस्कृति, इतिहास, परम्पराओं व जनता के अनुरूप हो ।जो आरोपित न हो वरन् जनता जिसमें रूचि लें और सहभागी हो, तथा हमारे जन-जीवन का जीवंत अभिन्न अंग बन जाए।

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