चंबल पुलिया के टूटने से लगभग आधा सैकड़ा से अधिक गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से टूटा।

0
चंबल पुलिया के टूटने से लगभग आधा सैकड़ा से अधिक गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से टूटा।
नदियों में आई बाढ़ का पानी कम हो गया जिससे नदियों के किनारे बसे गांव के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली परंतु रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ बिजली ,पानी की स्थिति जस की तस है चंबल नदी का पानी कम होते ही पुल के पास बनी एप्रोच पुलिया सड़क के दोनों ओर से मिट्टी कट जाने के कारण चंबल पार क्षेत्र के आधा सैकड़ा गांव का संपर्क पूर्णता मुख्यालय से टूट गया है जिससे बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचपाना भी संभव नहीं हो पा रहा है मरम्मत कार्य में जुटे लोक निर्माण विभाग कर्मियों ने बताया कि लखना-सिंडौस मार्ग को सुचारू रूप से आवागमन के लिए चालू होने में एक सप्ताह का समय लग जाएगा पुलिया पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है पानी भरा हुआ है पानी सूखने पर ही पुलिया की मरम्मत हो पाएगी फिलहाल दो पहिया वाहनों के लिए रास्ता खुला हुआ है। बाढ़ के बाद गांव में बढ़ेगा संक्रामक रोगों का खतरा। नदियों में आई बाढ़ का पानी गांव में घरों एवं गलियों में भरा हुआ है जिससे ग्रामीण बच्चे एवं पशु उसी गंदे पानी में रहने को मजबूर हैं भले ही नदियों में पानी कम हो गया है परंतु बाढ़ के बाद अब कामों में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बना हुआ है पशुओं में फैलने वाले खुर पका मुंह पका घुड़का रोगों के तेजी से फैलने का खतरा लगातार पशुपालक किसानों को सता रहा है फिलहाल पशुपालन विभाग हो या स्वास्थ्य विभाग दोनों ही विभागों की जिम्मेदारी है कि समय रहते बाढ़ पीड़ितों को उचित इलाज पशुओं के टीकाकरण का इस्तेमाल करवाया जा सके। प्रशासन की बाढ़ राहत सामग्री बनी ऊंट के मुंह में जीरा। नदियों में आई बाढ़ के बाद प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी जा रही है फिलहाल तो जिंदा रहने के लायक हैं परंतु नदियों का पानी कम होने के बाद भी लगभग पन्द्रह दिन में जनजीवन सामान्य हो पाएगा तब तक ग्रामीण इसी तरह सामग्री के सहारे ही जीवन यापन को मजबूर हैं। प्रशासन इस समय बाढ़ राहत के नाम जो राशन, तेल, सब्जी मुहैया करवाई जा रही है वह नाकाफी है। चंबल घाटी समग्र विकास आंदोलन के नेता अभिलाख सिंह जंजाली बाबा ने प्रशासन से पचास किलो अनाज के साथ साथ पन्द्रह दिनों का संपूर्ण राशन मुहैया करवाए जाने की मांग की है। यदि मिल रहा होता केरोसिन तो नहीं गुजारनी पड़ती अंधेरों में रातें। हम आपको बताते चलें कि लगभग पिछले तीन सालों से सरकारी सस्ते गलों की दुकानों पर राशन के साथ-साथ राशन कार्ड धारकों को राशन के साथ केरोसिन भी दिया जाता था जो बाढ़ आपदा जैसे समय पर विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर केरोसिन से लालटेन के सहारे से रोशनी करके काम चला लेते थे। आज लगभग एक सप्ताह से चकरनगर ब्लॉक की संपूर्ण विद्युत सप्लाई ठप पड़ी है बाढ़ ग्रस्त गांव में रात के अंधेरे में क्षेत्रवासियों को काफी परेशानी हो रही है बाढ़ पीड़ित गांव से बाहर बीहड़ी क्षेत्रों में त्रिपाल तान का रहने को मजबूर हैं जो रात के अंधेरे में डर के साए में जी रहे हैं यदि केरोसीन होता तो बड़ी राहत मिलती।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)