रिश्तों को आदर्श की डोर से बांधता है राम चरित मानस- आचार्य विनोद जी महाराज
अगस्त 01, 2021
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बृजनाथ तिवारी गोलाप्रतिनिधि गोरखपुर जीवन में रिश्तो का कोई मोल नही होता हर रिश्तो को ईमानदारी और त्याग से निभाना अपने संस्कार में अपनाना चाहिए। रिश्तो में कपट नही आना चाहिए क्योंकि कपट से रिश्ते टूट जाते है सुख शान्ति के लिये बने रिश्ते कपट से कलह का कारण बन जाते है। रिश्तों में त्याग और समर्पण होना चाहिए। रिश्तों का सर्वोत्तम उदाहरण राम चरित मानस में देखने को मिलता है जहां सभी पात्रों में त्याग, निष्ठा, समर्पण और प्रेम देखने को मिलता है। उक्त बाते गोला विकास खंड के कुड़वाआम (देवकली) स्थित पथ्वी नाथ शिव मन्दिर परिसर में श्रवण मॉस में शुक्रवार को शुरू हुई राम कथा में ब्यास पीठ से अयोध्या से पधारे कथावाचक मानस मर्मज्ञ आचार्य विनोद जी महाराज ने श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए कही। आगे उन्होंने कहा कि जो सबको अपना बना ले वह भोलेनाथ है जो सारे कष्टो का निवारण कर देते है वह अवघड दानी है, देने लगते है तो अपना ख्याल भी नही रखते है भस्मासुर उसका उदाहरण है।इसके पूर्व कथा का शुभारंभ सेवानिवृत शिक्षक अस्सी संगम दुबे एवं पूर्व प्रधान श्याम देव यादव ने ब्यास पीठ की आरती कर की अंत में कथा के आयोजक श्याम मुरारी यादव ने सभी श्रद्धालुओं को आभार व्यक्त किया इस अवसर पर धरणीधर दुबे, रामसहाय दुबे, देवेन्द्र दुबे,रमेश यादव, भागीरथी यादव, मोहन दुबे, रोहित मिश्र, चंद्रिका यादव, श्रीनिवास यादव, अक्षय यादव, प्रशांत यादव, अनिल यादव, मनीष दुबे, विक्रम यादव आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।


