ब्रेकिंग न्यूज
चकरनगर ।बाढ़ की बिभीषिका से जूझ रहे चम्बल घाटी परिक्षेत्र चकरनगर में शासन-प्रशासन द्वारा बाढ़ राहत सामग्री वितरण का फार्मूला जन-चर्चा का विषय बना हुआ है। बाढ़ पीड़ितों का दूर-दूर तक कोई पुरसाहाल दिखाई नहीं दे रहा है। जिलाधिकारी इटावा द्वारा आज शनिवार को चकरनगर थाना क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त गौहानी इलाके में बाढ़ राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में, शासन-प्रशासन के दावों की स्वतः ही पोल खुल गयी है। जहाँ पर बाढ़ राहत सामग्री के पांच पैकिट प्रति गांव के हिसाब से वितरण किये गये । यानि बाढ़ प्रभावित लग-भग पचास गांवों के सापेक्ष बाढ़ राहत सामग्री के मात्र पचास पैकिट ? बाढ़ग्रस्त इलाकों के लिए प्रशासन द्वारा बाढ़ राहत सामग्री के नाम पर पांच पैकिट प्रति गांव वितरित किये जाने से हमारे लोक-जीवन की लोकप्रिय लोकोक्ति "ऊँट के मुँह में जीरा" की कहावत को ही उलट कर रख दिया है।
इसी दौरान बाढ़ की बिभीषिका के बीच सत्ताधारी दल के नेता सरेआम आपदा में अवसर तलाशते स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। रही बात मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की,तो चम्बल घाटी में कुछ समय से लम्बे -चौड़े भाषणों के साथ 100 रुपये के सस्ते केक की दमपर विधान सभा पहुँचने की जुगत भिड़ा रहे,एक दल-बदलू परिवार से सम्बन्धित सपा के नवोदित नेता की जो त्रासदी के समय इस में "गधे के सींगों" की मानिंद गायब है। रही बात उन तमाम छुटभैये नेताओं की जो समय-समय पर चम्बल घाटी परिक्षेत्र चकरनगर के विभिन्न चौक-चौराहों पर अपने व अपने नेताओं की जयन्ती व जन्मदिन के आयोजन कर समाचार पत्रों में सुर्खियां तो बटोर लेते हैं।लेकिन क्या मजाल कि,किसी के काम आ जाँए ! कम से कम किसी आपदा में तो बिल्कुल भी नहीं !!

