अनैठा पंचायत में धड़ल्ले से कराया जा रहा मनरेगा का कार्य ट्रैक्टरों द्वारा, अधिकारी मौन?
चकरनगर संवाददाता
चकरनगर(इटावा), 24 जुलाई। ग्राम पंचायतों में किसी भी निर्माण कार्य को ठेकेदारों के माध्यम से कराए जाने का प्रावधान नहीं है। फिर भी देखा जा रहा है, कि जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में मनरेगा के सभी कार्य मजदूरों के बजाए ठेकेदारों व मशीनों से करवाए जा रहे हैं। इससे शासन द्वारा रोजगार मूलक कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी मजदूरों को मजदूरी उपलब्ध नहीं हो पा रही है और उन्हें मजदूरी की तलाश में राजस्थान के जयपुर, कोटा, जोधपुर, झालाबाड के अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद और मद्रास आदि शहरों के लिए पलायन करने को मजबूर होना पड़ता है।
मामले की हकीकत जानने के लिए शुक्रवार को हमारे संवाददाता द्वारा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ गांव अनेठा मैं संबंधित नवनिर्वाचित प्रधान, पंचायत मंत्री द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों की शह पर विधि विपरीत ट्रैक्टर द्वारा मनरेगा का कार्य ट्रैक्टर द्वारा धड़ल्ले से कराया जा रहा है। पूर्व में इस संदर्भ की सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित भी हुई थी लेकिन उसका कोई असर देखने को नहीं मिला बल्कि हुआ यह कि अधिकारियों की बढ़ी शह पर मशीनों द्वारा मनरेगा का कार्य बिंदास तौर पर कराया जा रहा है। सुनने में आया है कि अधिकारियों का कहना है कि अखबार वाले विरोधाभास के अलावा कर ही क्या सकते हैं और हमारी सेहत पर क्या असर पड़ने वाला? नवागत उप जिलाधिकारी सत्य प्रकाश जी से ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले समय में उप जिलाधिकारी ने जो भी किया कराया बहुत होता रहा लेकिन अब आपके आने से निश्चित ही भ्रष्टाचार युक्त अधिकारियों पर रोक लगेगी गरीब मजदूरों को गांव में ही जब रोजगार मिलेगा तो मजदूर घर से बाहर पेट पालने और परिजनों के भरण पोषण हेतु नहीं जाएगा। ग्रामीणों के द्वारा मुझे करीब एक दर्जन काश्तकारों के नाम दिए गए जिसमें बताया गया की इन काश्तकारों के खेतों में ट्रैक्टर और अन्य मशीनें चलवा कर कार्य करवाया गया है और इसका प्रदर्शन मनरेगा के तहत जॉब कार्डधारकों द्वारा धन निकासी की जाएगी जब मनरेगा के कुछ मजदूरों से बात की गई कि जॉब कार्ड के द्वारा रूपया निकाला जाएगा तो आप लोग अपना जॉब कार्ड क्यों देते हैं, तो इस पर उन्होंने सादा सा जवाब देते हुए बताया कि यह जॉब कार्ड कोई हम लोगों के जॉब कार्ड नहीं है उनके पर्सनल जॉब कार्ड है जो उनके खास या सगे संबंधियों के हैं उन्हीं के खातों में पैसा डाल कर या कुछ मजदूर मिलने वाले प्रतिशत के चक्कर में आकर अपना जॉब कार्ड भरवा लेते हैं जो बिधि विपरीत है। क्या वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेकर जांच करेंगे, और इस चल रहे ट्रैक्टर को पाबंद करेंगे?


